Home Bibles ☰ Books भजन संहिता 104:32 · हिन्दी बाइबिल
भजन संहिता 104:32 · हिन्दी बाइबिल

उसकी दृष्टि ही से पृथ्वी कांप उठती है, और उसके छूते ही पहाड़ों से धुआं निकलता है।

Cross references

निर्गमन 19:18

और यहोवा जो आग में होकर सीनै पर्वत पर उतरा था, इस कारण समस्त पर्वत धुएं से भर गया; और उसका धुआं भट्टे का सा उठ रहा था, और समस्त पर्वत बहुत कांप रहा था

भजन संहिता 50:3

हमारा परमेश्वर आएगा और चुपचाप न रहेगा, आग उसके आगे आगे भस्म करती जाएगी; और उसके चारों ओर बड़ी आंधी चलेगी।

भजन संहिता 77:16

हे परमेश्वर समुद्र ने तुझे देखा, समुद्र तुझे देखकर ड़र गया, गहिरा सागर भी कांप उठा।

भजन संहिता 77:19

तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ; और तेरे पांवों के चिन्ह मालम नहीं होते।

भजन संहिता 97:4

उसकी बिजलियों से जगल प्रकाशित हुआ, पृथ्वी देखकर थरथरा गई है!

भजन संहिता 114:7

हे पृथ्वी प्रभु के साम्हने, हां याकूब के परमेश्वर के साम्हने थरथरा।

भजन संहिता 144:5

हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ! पहाड़ों को छू तब उन से धुंआं उठेंगा!

यशायाह 64:1

भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे।

यिर्मयाह 4:23

मैं ने पृथ्वी पर देखा, वह सूनी और सुनसान पड़ी थी; और आकाश को, और उस में कोई ज्योति नहीं थी।

यिर्मयाह 5:22

यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम लोग मेरा भय नहीं मानते? क्या तुम मेरे सम्मुख नहीं थरथराते? मैं ने बालू को समुद्र का सिवाना ठहराकर युग युग का ऐसा बान्ध ठहराया कि वह उसे लांध न सके; और चाहे उसकी लहरें भी उठें, तौभी वे प्रबल न हो सकें, या जब वे गरजें तौभी उसको न लांध सकें।

आमोस 8:8

क्या इस कारण भूमि न कांपेगी? और क्या उन पर के सब रहनेवाले विलाप न करेंगे? यह देश सब का सब मि की नील नदी के समान होगा, जो बढ़ती है, फिर लहरें मारती, और घट जाती है।।

नहूम 1:5

उसके स्पर्श से पहाड़ कांप उठते हैं और पहाड़ियां गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन सारा संसार अपने सब रहनेवालों समेत थरथरा उठता है।।

हबक्कूक 3:5

उसके आगे आगे मरी फैलती गई, और उसके पांवों से महाज्वर निकलता गया।

हबक्कूक 3:6

वह खड़ा होकर पृथ्वी को नाप रहा था; उस ने देखा और जाति जाति के लोग घबरा गए; तब सनातन पर्वत चकनाचूर हो गए, और सनातन की पहाड़ियां झुक गई उसकी गति अनन्त काल से एक सी है।

हबक्कूक 3:10

पहाड़ तुझे देखकर कांप उठे; आंधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात् लहरों को ऊपर उठाया।

Interlinear

Choose Theme