और अजर्याह जो परमेश्वर के भवन का प्रधान और हिलकिरयाह का पुत्रा था, यह पशुल्लाम का पुत्रा, यह सादोक का पुत्रा, यह मरायोत का पुत्रा, यह अहीतूब का पुत्रा था।
Cross references
और जब हारून और उसके पुत्रा छावनी के कूच के समय पवित्रास्थान और उसके सारे सामान को ढंाप चुकें, तब उसके बाद कहाती उसके उठाने के लिये आएं, पर किसी पवित्रा वस्तु को न छुएं, कहीं ऐसा न हो कि मर जाएं। कहातियों के उठाने के लिये मिलापवाले तम्बू की ये ही वस्तुएं हैं।
मिलापवाले तम्बू में गेर्शोनियों के कुलों की यही सेवकाई ठहरे; और उन पर हारून याजक का पुत्रा ईतामार अधिकार रखे।।
मरारियों के कुलों की सारी सेवकाई जो उन्हें मिलापवाले तम्बू के विषय करनी होगी वह यही है; वह हारून याजक के पुत्रा ईतामार के अधिकार में रहे।।
प्रधान याजक अहीतूब का पुत्रा सादोक और एब्यातर का पुत्रा अहीमेलेक थे; मंत्री सरायाह था;
तब राजा ने हिलकिरयाह महायाजक और उसके नीचे के याजकों और द्वारपालों को आज्ञा दी कि जितने पात्रा बाल और अशेरा और आकाश के सब गण के लिये बने हैं, उन सभों को यहोवा के मन्दिर में से निकाल ले आओ। तब उस ने उनको यरूशलेम के बाहर किद्रोन के खेतों में फूंककर उनकी राख बेतेल को पहुंचा दी।
और जल्लादों के प्रधान ने सरायाह महायाजक और उसके नीचे के याजक सपन्याह और तीनों द्वारपालों को पकड़ लिया।
अहीतूब से सादोक, सादोक से अहीमास।
यहीतूब से सादोक, सादोक से शल्लूम।
तब वे चिट्ठी डालकर बराबर बराबर बांटे गए, क्योंकि एलीआजर और ईतामार दोनों के वंशों में पवित्रास्थान के हाकिम और परमेश्वर के हाकिम नियुक्त हुए थे।
और कोनन्याह और उसके भाई शिमी के नीचे, हिजकिरयाह राजा और परमेश्वर के भवन के प्रधान अजर्याह दोनों की आज्ञा से अहीएल, अजज्याह, नहत, असाहेल, यरीमेत, योजाबाद, एलीएल, यिस्मक्याह, महत और बनायाह अधिकारी थे।
मरायाह, अजर्याह, यिर्मयाह;
और सरायाह जो परमेश्वर के भवन का प्रधान और हिल्किरयाह का पुत्रा था, यह मशुल्लाम का पुत्रा, यह सादोक का पुत्रा, यह मरायोत का पुत्रा, यह अहीतूब का पुत्रा था।
जब यिर्मयाह यह भविष्यद्वाणी कर रहा था, तब इम्मेर का पुत्रा पशहूर ने जो याजक और यहोवा के भवन का प्रधान रखवाला था, वह सब सुना।
जब मन्दिर के सरदार और महायाजकों ने ये बातें सनीं, तो उन के विषय में भारी चिन्ता में पड़ गए कि यह क्या हुआ चाहता है?
तक सरदार, प्यादों के साथ जाकर, उन्हें ले आया, परन्तु बरबस नहीं, क्योंकि वे लोगों से डरते थे, कि हमें पत्थरवाह न करें।