तब दाऊद ने इस्राएल की सारी मण्डली से कहा, यदि यह तुम को अच्छा लगे और हमारे परमेश्वर की इच्छा हो, तो इस्राएल के सब देशों में जो हमारे भाई रह गए हैं और उनके साथ जो याजक और लेवीय अपने अपने चराईवाले नगरों में रहते हैं, उनके पास भी यह कहला भेजें कि हमारे पास इकट्ठे हो जाओ।
Cross references
यदि तू यह उपाय करे, और परमेश्वर तुझ को ऐसी आज्ञा दे, तो तू ठहर सकेगा, और ये सब लोग अपने स्थान को कुशल से पहुंच सकेंगें।
और मिलापवाले तम्बू में परमपवित्रा वस्तुओं के विषय कहातियों का यह काम होगा,
इस्त्राएलियों को आज्ञा दे, कि तुम अपने अपने निज भाग की भूमि में से लेवियों को रहने के लिये नगर देना; और नगरों के चारों ओर की चराइयां भी उनको देना।
पलिश्ती तो इस्राएलियों से लड़े; और इस्राएली पुरूष पलिश्तियों के साम्हने से भागे, और गिलबो नाम पहाड़ पर मारे गए।
तब राजा नातान नाम भविष्यद्वक्ता से कहने लगा, देख, मैं तो देवदारू के बने हुए घर में रहता हूँ, परन्तु परमेश्वर का सन्दूक तम्बू में रहता है।
उन्हों ने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके अधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे अधीन बने रहेंगे।
परन्तु राजा योराम आप अपने घाव का जो अराम के राजा हजाएल से युठ्ठ करने के समय उसको अरामियों से लगे थे, उनका इलाज कराने के लिये यिज्रैल को लौठ गया था। ) तब येहू ने कहा, यदि तुम्हारा ऐसा मन हो, तो इस नगर में से कोई निकल कर यिज्रैल में सुनाने को न जाने पाए।
और उनके भागों में उनकी छावनियों के अनुसार उनकी बस्तियां ये हैं, अर्थात् कहात के कुलों में से पहिली चिट्ठी जो हारून की सन्तान के नाम पर निकली।
यह देखकर कि वे भाग गए, और शाऊल और उसके पुत्रा मर गए, उस तराई में रहनेवाले सब इस्राएली मनुष्य अपने अपने नगर को छोड़कर भाग गए; और पलिश्ती आकर उन में रहने लगे।
तब दाऊद ने कहा, लेवियों को छोड़ और किसी को परमेश्वर का सन्दूक उठाना नहीं चाहिये, क्योंकि यहोवा ने उनको इसी लिये चुना है कि वे परमेश्वर का सन्दूक उठाएं और उसकी सेवा टहल सदा किया करें।
तब दाऊद ने सब इस्राएलियों को यरूशलेम में इसलिये इट्ठा किया कि यहोवा का सन्दूक उस स्थान पर पहुंचाएं, जिसे उस ने उसके लिये तैयार किया था।
इसलिये दाऊद ने हारून के सन्तानों और लेवियों को इकट्ठा किया :
और उस ने यरूशलेम में रहनेवालों को याजकों और लेवियों को उनका भाग देने की आज्ञा दी, ताकि वे यहोवा की व्यवस्था के काम मन लगाकर कर सकें।
बिना सम्मति की कल्पनाएं निष्फल हुआ करती हैं, परन्तु बहुत से मंत्रियों की सम्मत्ति से बात ठहरती है।